गुप्त शिव मंत्र का अकेले में जाप करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी

हम आपको आज गुप्त शिव मंत्र के बारे में बता रहे है, जो इनके नाम के अनुरूप है। भगवान शिव जितने भोले है उतने ही विनाशक भी है। शिवजी जितनी समस्या का समाधान घर परिवार के लिए करते है। Gupt Shiv Mantra ऐसे मंत्र है जिन्हे बहुत ही ध्यान से करने की आवश्यकता होती है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि ऐसे भी कोई मंत्र होते है तो अब आपको उन मंत्रो से रूबरू कराएंगे –

गुप्त शिव मंत्र भगवान शिव की पूजा एवम साधना में use किया जाता है। शिव की आराधना में साधक द्वारा उच्चारण किया जाता है। इन मंत्रो को उन्नत ध्यान, साधना एवम विद्या के लिए किया जाता है जो किसी गुरु के मार्गदर्शन में किया जाता है। क्योंकि Gupt Shiv Mantra में थोड़ी सी गलती होने पर reaction करते है जिन्हे कोई भी ईश्वर माफ़ नहीं कर पाएंगे।

Gupt Shiv Mantra

धनदायक शिव मंत्र 

     आज के आधुनिक युग में सभी भौतिक सुख सुविधा की चाह रखते है। लेकिन इन सभी सुख सुविधा को प्राप्त करने के लिए एक चाबी होना बहुत जरूरी है। वो चाबी है धन यानी Money। हर सभी इस धन के बिना कुछ भी भौतिक सुख सुविधा से वंचित रहेगा। Social media पर आजकल ठगी करने बहुत हो गए है जो धन प्राप्त करने के चक्कर में अपने पास इकठ्ठा Money भी गंवा देते है।

       आपको हम ऐसे धनदायक शिव मंत्र बता रहे है जिनको श्रद्धा एवम विश्वास से करने पर अथाह धन संपत्ति के मालिक बन जायेंगे।  यदि आप सही मन से नही करेंगे तो धन लाभ नहीं होगा तो आपके जमा धन से तो कम नहीं होगा। अब आपको Dhandayak Shiv Mantra बता रहे है जिसे करके आप धन के मालिक बन जायेंगे।

इस मंत्र का 21 बार जाप करते हुए शिवलिंग पर जल में थोड़ा दूध मिलाकर अर्पित करने से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होता है।

महादेव को बुलाने का मंत्र 

    महादेव यानी भोलेनाथ जो नाम की तरह भोले है। केवल जल यानी जलाभिषेक से खुश होकर आशीर्वाद देने वाले है। आज हम महादेव को बुलाने का मंत्र आपको बताने जा रहे है। ये तो देवों के देव है, जो मंत्रो और सद्भावना से याद करने से वरदान देते है। आशा है आप निम्न मंत्रों को विधिवत करेंगे तो आप महादेव को अपने पास पाएंगे।

     Mahadev ko bulane ka mantra के अंतर्गत इस मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार करना चाहिए। इससे व्यक्ति का शरीर और दिमाग शांत रहता है। इस मंत्र के जाप से महादेव अति प्रसन्न होते हैं।

    महादेव को सबसे प्यारा  मंत्र “ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का महामंत्र है जो उन्हें बुलाने और उन्हे मनाने में सहायक हो सकता है। इस मंत्र का जाप ध्यान एवं भक्ति के साथ नियमित रूप से करने पर महादेव का भक्त पर पूरा आशीर्वाद बना रहता है।

“ॐ नमः शिवाय” महादेव का सबसे सरल एवम जाना पहचाना मंत्र है। इस मंत्र का आशय है की मैं om मतलब भगवान शिवजी के सामने हमेशा नतमस्तक रहे। भक्त जब भगवान को पूरी तरह समर्पित हो जाता है तो भक्त महादेव को पास बुलाने में सक्षम हो जाता है। इस मंत्र का जाप 108 बार किया जावे तो भक्त के शरीर और दिमाग को शांत करता है।

 यह मंत्र रुद्र मंत्र Rudra Mantra कहलाता हैं। यह मंत्र महादेव तक आपकी सभी मनोकामनाएं पहुंचाता है।

यह मंत्र महामृत्युंजय जाप है। हम जिस त्रिनेत्र धारी महादेव को पूजते हैं  वो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं।  इस मंत्र का सदैव जाप करने से महादेव बाबा अकाल मृत्यु, संकट एवम जीवन में आने वाली हर परेशानी दूर करते है।

यह शिव गायत्री मंत्र Shiv Gayatri Mantra है जिसे सर्वशक्तिशाली माना जाता है। महादेव के सामने इस मंत्र का जाप करने से भक्त को सुख और शांति की प्राप्ति होती है। 

भक्त जब भक्ति या मनोकामना के लिए पूजा, पाठ, अभिषेक एवम जाप करता है तो मानव स्वभाव के अनुरूप कोई ना कोई त्रुटि अवश्य होती है। इन अनजान त्रुटियों का दोष समाप्त करने के लिए महादेव से अपने कर्मों की क्षमाप्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त के इस तरह जाप करने से महादेव सारे अपराध समाप्त कर उसके साथ रहते है।

  इन मंत्रो के अलावा निम्न मंत्र का नियमित रूप से जाप कर महादेव को बुलाने कार्य कर सकते है –

इस तरह महादेव को बुलाने का मंत्र जपकर महादेव की पूरी कृपा प्राप्त कर सकते है।

शिव तांत्रिक मंत्र 

शिवजी को भूतनाथ नाम से भी पूजा जाता है। देवों के देव शमशान वासी होकर तांत्रिक सिद्धि दाता भी है। तंत्र कर्म में शिव के समान कोई भी सिद्धि नही है। तंत्र के राजा कालो के काल महाकाल की साधना करके सभी सिद्धि प्राप्त की जाती है। इन मंत्र से सारे कष्ट दूर होते है। तंत्र विद्या में शिव साबर मंत्र की साधना से महाकाल को शीघ्र प्रसन्न करते है। अब आप इन मंत्र को जानने के इच्छुक होंगे। अब आपको शिव तांत्रिक मंत्र की जानकारी देने की कोशिश कर रहे है।

“ॐ जूं स:” मृत्युंजय मंत्र (लघु) की साधना बीमारी, असाध्य रोग, दुःख, पीड़ा, मृत्यु जैसी समस्या से निपटने हेतु रात्रि 9 बजे बाद शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हुए जप करने से  भगवान आशुतोष जिन्हे काल का भी काल यानि महाकाल कहा गया है वे अपनी पूर्ण कृपा बरसाते है। इस मंत्र का जप जितना ज्यादा से ज्यादा संभव हो करना चाहिए। इससे न केवल बीमारियां बल्कि समस्त तरह से दुख और संकट भी दूर भाग जाते हैं। भगवान आशुतोष दुःख हरता है।

शत्रु नाशक शिव मंत्र 

     मनुष्य अपने जीवन काल में अपने किए गए कार्यों से बहुत लोग खुश होते है तो कई नाराज होते है। कई बार नाराजगी शत्रुता में transfer हो जाती है। शत्रु बलवान या आर्थिक दृष्टि से मजबूत होने से मुकाबला होना संभव नहीं हो सकता है। ऐसे शत्रु से केवल और केवल भगवान की शरण ही सीधे एवम सरल लोगो की रक्षक बनती है। तो हम आपको आसान रास्ता शत्रु नाशक शिव मंत्र का बता रहे है जिससे अपने शत्रु को चुटकियों में fail कर देता है। 

    Shatru Naashak Shiv Mantra में इतनी ताकत है की उसे स्वयं सिद्ध करके अपने शत्रु का विनाश कर सकता है। अब आपको लंबा इंतजार नहीं कराते हुए शिव मंत्रो को अंकित कर रहे है जिसका विधि एवम नियम से साधना करने पर आप अपने Mission को Success कर सकेंगे।

   मंत्र जाप करने से पहले शिवलिंग को पंचामृत, गंगाजल,पुष्प और नैवैद्ध से पूजन करे। पंचमुखी रुद्राक्ष की छोटे दानों वाली माला भोलेनाथ को पहना दीजिए अफेयर दूसरी माला से जप करना चाहिए। साधना के बाद यह माला दिव्य हो जाती हैं। इसके बाद एक पाठ रुद्राष्टक का करें  मंत्र जप की सिद्धि के लिए प्रार्थना करें। अब अपनी संकल्प शक्तिअनुसार ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

      उपरोक्त मंत्र का जाप 108 बार करने से ये मंत्र सिद्ध होता है। मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद एक पाठ रुद्राष्टक का ओर दोबारा गुरु मंत्र का करें। पूरा दिन यहीं क्रम करें। मंत्र साधना में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन, भूमिशयन करें।

गुप्त शिव मंत्र 

भगवान शिव के गुप्त शिव मंत्र के बारे में आप यह जानने को उत्सुक होंगे कि इन Gupt Shiv Mantra से किस कार्य या मनोकामना पूर्ण कर सकते है। यहां हम आपको इन मंत्रों के अर्थ बता रहे है –

ॐ अघोराय नम:  – यह मंत्र अघोर स्वरूप शिव को समर्पित है, जो सभी दुःखों और भयों को नष्ट करने वाले हैं।

ॐ शर्वाय नम: :- यह मंत्र सर्व स्वरूप शिव को समर्पित है, जो सभी लोगों के संरक्षक और पालक हैं।

ॐ विरूपाक्षाय नम: :– यह मंत्र विरूपाक्ष स्वरूप शिव को समर्पित है, जो सबके अन्तर्दृष्टि के धारक हैं।

ॐ विश्वरूपिणे नम: :– यह मंत्र विश्वरूपी स्वरूप शिव को समर्पित है, जो समस्त ब्रह्माण्ड के सम्पूर्ण रूपों में प्रकट होते हैं।

ॐ त्र्यम्बकाय नम: :– यह मंत्र त्र्यम्बक स्वरूप शिव को समर्पित है, जो तीनों लोकों के संरक्षक हैं।

ॐ कपर्दिने नम:  :- यह मंत्र कपर्दी स्वरूप शिव को समर्पित है, जो शवों के प्रभु हैं और अंतिम संस्कार के द्वारा मुक्ति प्रदान करते हैं।

ॐ भैरवाय नम: :– यह मंत्र भैरव स्वरूप शिव को समर्पित है, जो भय का नाश करने वाले हैं और सद्गति की प्राप्ति में सहायता करते हैं।

ॐ शूलपाणये नम: –   यह मंत्र शूलधारी स्वरूप शिव को समर्पण है जो अधर्मियो एवम दुष्टों को सजग करने वाले है।

 ॐ ईशानाय नम: – यह मंत्र ईशान स्वरूप शिव को समर्पित है, जो सर्वोच्च शक्ति जगत प्रभु है।

ॐ महेश्वराय नम:  :– यह मंत्र महेश्वर स्वरूप शिव को समर्पित है, जो सभी के संहारक और पालक हैं।

ये मंत्र शिव पूजा और साधना में आपकी आदर्शता के अनुसार उपयोग किए जा सकते हैं। ध्यान और साधना के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से आप शिव के समीप और उनकी कृपा में रह सकते हैं।

शिव अघोरी मंत्र 

मनुष्य कभी भी किसी का बुरा नही सोचता है किसी का विनाश का नहीं सोचता है। इन में मानव निर्मित कोई भी उपाय सहायता नहीं कर सकता है। ऐसे में मनुष्य के पास केवल भगवान की प्रार्थना ही सहारा होता है। इन्ही सहारो में जल्दी से अभीष्ट परिणाम के लिए शिव अघोरी मंत्र ही सर्वाधिक प्रयोग में लाया जाता है।

    सभी भगवान दयालु के साथ साथ क्रोधित भी होते है किंतु भगवान शिव दयालु भी बहुत है एवम क्रोधित होने पर तीसरी आंख खोलने में देरी नहीं करते है। तीसरी आंख खोलने का मतलब पूरे ब्रह्माण्ड में प्रलय आना होता है। 

   इन अघोरी मंत्रो की साधना में भगवान शिव के रौद्र और क्रोधित स्वरूप का स्मरण कर उन्हें दुष्ट भूत प्रेत, खराब ग्रह एवम शत्रुओं के प्रभाव समाप्त करने को प्रेरित किया जाता है। जिससे आने वाली विपत्तियों से निपटा जा सके। अघोरी श्मशान में तीन तरह से साधना करते है –

       – श्‍मशान साधना, शिव साधना, शव साधना। 

   ऐसी साधनाएं अक्सर तारापीठ के श्‍मशान, कामाख्या पीठ के श्‍मशान, त्र्यम्‍बकेश्वर और उज्जैन के चक्रतीर्थ के श्‍मशान में होती है। अघोर पंथियों के 10 तांत्रिक पीठ माने गए हैं। 

             रक्षा के लिए अघोर रुद्र मंत्र

ॐ ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोरतर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बन्धय बन्धय खादय खादय हुं फट् स्वाहा ।

         अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो अघोरेघोरेतरेभ्यः।

          सर्वतः सर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्र रूपेभ्यः।

बेहद ही शक्तिशाली माने जाने वाले इन मंत्र की साधना से हम भगवान शिव के अघोरे रूप को नमन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। भगवान शिव के अघोर स्वरूप को एक अभीतस्य और रुद्र स्वरुप से जोड़ा जाता है, जिनसे लोग भय खाते हैं।

शिव मंत्र जप 

भगवान शिव तो भांग धतूरा खा कर भूतो के साथ नृत्य करने वाले सदा भक्तो से खुश रहते है। वैसे तो भगवान शिव पंचाक्षर मंत्र ॐ नम: शिवाय जाप से खुश हो जाते है। आप इस मंत्र के अलावा भी शिव मंत्र जाप करना चाहते है तो हम अन्य Shiv Mantra Jap से भी आपको परिचित करा रहे है।

शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।

ॐ नम: शिवाय।  सोमवार को पूजा करते समय नामावली मंत्रों का जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है.

“शिवो गुरु: शिवो देव: शिवो बन्धु: शरीरिणाम् । शिव आत्मा शिवो जव:  शिवादन्यत्र  किंचन ॥

 शिव मन्त्र: अर्थात भगवान शिव ही गुरु हैं, शिव ही देवता हैं, शिव ही प्राणियों के बन्धु हैं, शिव ही आत्मा और शिव ही जीव हैं, शिव से भिन्न कुछ नहीं है। सदगुरु के साकार रूप की भी पूर्णता उनके शिव स्वरूप में ही होती है। 

विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे। श्रेय:प्राप्तिनिमित्ताय नम: सोमाद्र्धधारिणे।।

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं। त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्।।

ॐ देवाधिदेव देवेश सर्वप्राणभूतां वर। प्राणिनामपि नाथस्त्वं मृत्युंजय नमोस्तुते।।

12 राशियों के अनुसार शिव मंत्र

  1. मेष – ॐ नम: शिवाय।।
  2. वृष – ॐ नागेश्वराय नमः।।
  3. मिथुन – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।।
  4. कर्क – ॐ चंद्रमौलेश्वर नम:।।
  5. सिंह – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।।
  6. कन्या – ॐ नमो शिवाय कालं ॐ नम:।।
  7. वृश्चिक – ॐ हौम ॐ जूँ स:।।
  8. धनु – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।।
  9. मकर – ॐ हौम ॐ जूँ स:।।
  10. कुंभ – ॐ हौम ॐ जूँ स:।।
  11. मीन – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।।

    शिव की भी पूर्णता उनके शिव स्वरूप में ही होती है। शिव की साधना, शिव की आराधना, उपासना से ही संसार के समस्त पदार्थ प्राप्त हो सकते हैं। समस्त कामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। अन्य देवी-देवता तो फिर भी सिमित शक्तियों से बंधे होते हैं और अपनी शक्ति और क्षमतानुसार ही वर दे पाते हैं परन्तु मात्र शिव ही ऐसे देव हैं भगवान हैं जो सब कुछ प्रदान करने में समर्थ हैं। संसार के समस्त मंत्र भगवान शिव के डमरू निनाद से ही निकले हैं और उन्हीं शिव मंत्रों को गुरु (जिन्हें शास्त्रों में शिव का ही रूप कहा गया है) द्वारा प्राप्त कर साधना सम्पन्न की जाये तो सफलता मिलने में कोई संशय नहीं होता। 

महाकाल का मंत्र 

        कालो के काल महाकाल का मंत्र बड़ा ही प्रभाव शाली है। निम्न महाकाल के मंत्र छोटी से बड़ी परेशानियों से भक्तो को बचाकर अपना आशीर्वाद का हाथ रखते है। आपको महाकाल के मंत्रो से अवगत करा रहे है जिससे महाकाल आपको सुख शांति के साथ जीवन यापन, आकस्मिक मृत्यु से बचाव, असाध्य बीमारी से दूर एवम आसुरी ताकतों से बचाते है। 

  महामृत्युंजय मंत्र:-

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।

 ॐ शिवाय नम:

 ॐ ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ॐ। 

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।।

कर-चरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा

श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम,

विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व,

जय-जय करुणाब्धे, श्री महादेव शम्भो॥

ॐ नमः शिवाय

ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ऊं।

ॐ मृत्युंजय महादेव त्राहिमां शरणागतम

जन्म मृत्यु जरा व्याधि पीड़ितं कर्म बंधनः

ॐ नमो भगवते रुद्राय। 

 ‘ऐं ह्रीं श्रीं ‘ॐ नम: शिवाय’ : श्रीं ह्रीं ऐं। 

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