श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के फायदे व अर्थ : मंत्र कौनसे ग्रंथ में लिखा है

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के फायदे:-  इस संसार में सबसे जानदार और शानदार जीव मनुष्य है मनुष्य का जीवन अनमोल है और मनुष्य अपने जीवन काल में तरह-तरह की परेशानियों से गुजरता है जिसकी वजह से वह अवसाद में चला जाता है और उसकी सारी खुशियां छिन जाती है इसलिए मनुष्य को दुखों से छुटकारा पाने के लिए श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के फायदे का जब करना चाहिए

Shri Shivay Namstubhyam Mantra

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के फायदे

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र (Shri Shivay Namstubhyam Mantra) शिव महापुराण से लिया गया है इस मंत्र को शिव पुराण के नाम से भी जाना जाता है Shiv Puran मूल रूप से भगवान शिव को समर्पित की गई है इस पुराण में भगवान भोलेनाथ की महिमा का विस्तार पूर्वक गुणगान गया गया है जो भी भक्त शेव संप्रदाय से संबंध रखता है उसके लिए यह शिव पुराण बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के कई फायदे शिव पुराण में उल्लेखित किए गए हैं जो की कुछ इस प्रकार से है

  1. शिव पुराण का यह मंत्र इतना अधिक प्रभावशाली है की इस मंत्र को महामृत्युंजयम मंत्र के बराबर बताया गया है
  2. इस मंत्र के जाप करने से आपको हजार महा महामृत्युंजयम मंत्र जाप करने का लाभ मिलता है
  3. इस मंत्र का नियमित उच्चारण करने से किसी भी व्यक्ति को सुख और धन समृद्धि में लाभ होता है
  4. श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के जाप करने से जीवन की सारी बाधाए मिट जाती है
  5. यदि आप कोई शुभ कार्य करने जा रहे हैं तो आप इस मंत्र का जाप करें जिससे आपको कार्य में सफलता मिलेगी
  6. यदि आप कोई शारीरिक बीमारी से ग्रस्त है तो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करके आप अपने रोग से छुटकारा पा सकते हैं
  7. मंत्र का जाप करने से मानसिक विकारों से व्यक्ति मुक्ति पा सकता है
  8. अगर आप भी आर्थिक तंगी से परेशान है तो आप इस मंत्र का जाप करके उससे छुटकारा पा सकते हैं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की जाप विधि

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करने की विधि कुछ इस प्रकार हम आपको बता रहे हैं जो नीचे लेख में उल्लेखित की गई है चलिए जानते हैं

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहन कर इस मंत्र का जाप करना चाहिए
  2. जिस आसन पर आप बैठकर इस मंत्र का जाप कर रहे हैं वह आसान साफ और स्वच्छ होना चाहिए
  3. मंत्र का जाप करने से पूर्व आप शिवजी की फोटो या शिवजी की प्रतिमा को अपने सामने स्थापित करें और शिवजी की प्रतिमा को नमस्कार करें अपने मन में शिव जी का ध्यान करते हुए मंत्र का उच्चारण करें
  4. और सबसे महत्वपूर्ण बात किस मंत्र का उच्चारण करते समय आपको विशेष रूप से अपने मन में किसी के लिए क्रोध की भावना नहीं रखना है
  5. मंत्र का जाप करने के दौरान मंत्र का उच्चारण सही शब्दों में करें
  6. मंत्र का उच्चारण करने के साथ-साथ माला जप करने के लिए आप पूर्व दिशा में अपना मुख करके जप करें
  7. इस मंत्र का जाप करने के लिए रुद्राक्ष की 108 मोती वाली माल का उपयोग करें क्योंकि इस मंत्र को आपको 108 बार ही जाप करना है माला जप करने के लिए निश्चित संख्या का होना बहुत जरूरी होता है
  8. अगर आप इस मंत्र का 108 बार नियमित जाप कर लेते हैं तो आपको इससे अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकते है

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र और उनका अर्थ

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का अर्थ है कि “हे शिव में आपको नमस्कार करता हूं या श्री शिव को मेरा नमस्कार है”

श्री– श्री,  शिवाय– भगवान शिव,  नमस्तुभ्यं– नमस्कार

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति कहां से हुई

हिंदू ग्रंथो में माना जाता है कि श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की उत्पत्ति शिव महापुराण से हुई है जिसे शिव पुराण के नाम से भी जाना जाता है और शिव पुराण मूल रूप से भगवान शंकर को समर्पित है इस मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता है लेकिन सुबह का समय इस मंत्र के जाप के लिए लाभदायक माना जाता है

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